Saturday, August 22, 2020

समय यात्रा और चौथे डाईमेशन की खोज...........

 समय यात्रा और चौथे डाईमेशन की खोज...........
(भाग - 1)

मै कभी कभी सोचता हूँ कि मैं अमर हूँ । मेरे लिये समय की कमी होना, और जिन्दगी खोने का डर। सोचता हूँ कि एकदम मन चाहे तरीके से जीवन जी लूँ पर पर जब सपनों की दुनिया से बाहर आता हूँ तो कुछ विचित्र सा होता है, मै सच्चाई से भाग नहीं सकता इसका अहसास होता है। और समय एक अनमोल चीज है इसका भी एहसास होता है। आज हम सबके पास बस एक चीज नहीं वह कौन सी है ! वह है ‘समय’!

आज हम बात करते है समय की अर्थात् अग्रेजी में कहें तो टाईम की और उसमें यात्रा  करने की टाईम ट्रैवल की ।

टाईम ट्रैवल आपनें इस विषय के बारे में बहुत सुना होगा बहुत पढा होगा। पर सच में हम जैसे इन्सानो के लिए टाईम ट्रेवल करना संभव है।

Stephen hawking into a time traval.........

कुछ वर्षो पहले आप महान वैज्ञानिक प्रोफेसर स्टीफन हाँकिंग से यह सवाल पूछते तो वे इस सवाल पर साफ इन्कार कर देते। क्यों की उनके पास इसका कारण था वह पूछते की अगर मानव ने भविष्य में ऐसी कोई खोज की है अर्थात् टाईम मशीन बनाई हो तो भविष्य से आने वाले यात्री कहाँ हैं ?

वह 19वीं शताब्दी का दौर था स्टीफन हाँकिंग जी के पहले का समय था जिस समय भौतिकी नें अपनी जगह पक्की की थी, उस वक्त तक बहुत से संशोधन हो चुके थे। पर आखिर टाईम ट्रैवल की बात आई कैसे तो चलिए हम वह भी देखते है।

jorge bernhard Riemann (1826-1866)..............

10 जून 1854 का वह दिन था। उस दिन गणित नें यूक्लीड  के 2000 वर्षों के गणित के साम्राज्य को उल्ट दिया था उसका नाम था जाँर्ज बर्न्हार्ड रीमानं, उस दिन रीमानं नें गाँटेंजन युनिवर्सिटी के प्राध्यापकों के सामनें एक भाषण दिया जिसमें उसनें फोर्थ डाईमेशन की बात की थी। सभी आश्चर्यचकित हुए। पर उसने सच में यूक्लीड के ज्यामिति सिद्धांत  ने जो सिद्ध किये थे वह तीन डामेंशन तक ही थे उससे भी ज्यादा डाईमेशन होने की बात करी और उन्होंने इसे गणित से साबित भी किया। उसका कहना था की यूक्लीड के अनुसार लंम्बाई, चौड़ाई और ऊँचाई यही विश्व में डाईमेशन या मिति हो सकती है उससे अधिक नहीं । उसी से उसनें त्रिकोणमिती के गणिती समीकरण भी बनाए।

Euclid( 300 BCE)................

रीमानं ने सोचा की यूक्लीडके भुमिती के त्रीमीती से परे मैं सोंचू तो क्या होगा,  और वह लग गया काम में और उसने लगातार सात साल  काम किया अलग अलग गणिती समीकरण बनाए। और आखिर में उसे वह मिल गया जो उसनें सोचा था।

उसनें मेट्रीक टेन्सर से तीन मीती या डाईमेशन से अधीक डाईमेशन पर विचार प्रस्तुत किया उसका मानंना था की हम सिर्फ तीन डाईमेशन में ही रहते हैं ।

अगर हम चौथे डाईमेशन मे चले गये तो क्या होगा। बस यही बात थी… लोग फिर इसी  विषय में लगे । आखिर चौथे डाईमेशन की कल्पना करे तो कैसे करे। जो हमंने नहीं देखा और इससे पहले भी नहीं था वह कैसा होगा। फिर तरह तरह की सोच लेकर उस पर भाष्य करनें लगे। लोगो को लग रहा था अगर चौथा डाईमेशन है तो हमें गाडी की जरुरत ही नहीं होगी हम कही भी कितनी भी दूर अंतर चुटकी में पार कर लेंगे। समझते है की हम चौथे डाईमेशन में है और वहाँ हमने दरवाजा बनाया जो  हमनें खोला तो पृथ्वी के दूसरे छोर पर पाव रखें।

इस तरंग से कई अलग अलग बाते लोग कर रहे। इसी तरह यह विषय लोगों मे सुर्खियां बटोरता रहा।

 समझो एक कीडा है जो जमीन पर ही रहता है। सांप, कृमी कुछ भी जिसके पूरे जीवन में वह सिर्फ दो ही डाईमेशन में सफर करता है। तो उसके लिए तीसरे डाईमेशन की कल्पना करना कैसे रहेगा।

उसके लिए तीसरा डाईमेशन अर्थात् ऊँचाई कुछ माइने नहीं रहती वह सिर्फ चौड़ाई और लंबाई ही जानता है। अगर समझो वह चलते चलते हमारे बूट के पास आयेगा तो वह सिर्फ बूट का वही हिस्सा देख सकता है तो उसके सामने है । जो लम्बाई और चौड़ाई डाईमेशन में आता है वह तो हमें देख ही नहीं सकता। इसी तरह हम भी चौथे डाईमेशन के बारे में सोच भी नहीं सकते।

Imagination Time in forth dimension.........

मान लो हमने टाईम को चौथा डाईमेशन मान लिया तो क्या होगा। मतलब हम अगर तीन डाईमेशन छोडकर चौथे डाईमेशन में चले गये।

समय जो है आईनस्टाईन के अनुसार धाराप्रवाह होता है एक नदी की तरह वो किसी जगह कम या किसी जगह ज्यादा होता है पर फिर भी हर किसी के लिए सापेक्ष रहता है।

जो की समय कोई ठोस वस्तु या पदार्थ नहीं पर फिर भी समय तीन अवस्था में पाया जाता है “भूतकाल-वर्तमानकाल-भविष्यकाल” और इन तीनों अवस्था के बारे में हमें पता है । हम लोग दो अवस्था में रहते है और तीसरी अवस्था दोनो के बिलकुल पास होती है। वैसे तो हम तीनों ही अवस्था से गुजरते है।

अर्थात् समय में जा सके तो क्या हम अपने भुत और भविष्य में जा सकेंगें बस यही से टाईम ट्रैवल की बात छीड गई और लोंगो ने तो इसे सीर पर उठा लिया। उस समय अगर धर्मगुरु से भी कोई पूछता की भाई ईश्वर कहाँ है। तो उनके पास कोई जवाब ना होने के कारण उसे चौथे डाईमेशन में भेज देते।

लेखकों में भी यही विषय चर्चा में रहा। फिर इसके कहानी संग्रह आए उस समय एक कादंबरी ज्यादा चर्चे में रही वो थी एच जी वेल्स द्वारा लिखित द टाईम मशीन…. इस कादंबरी में लेखक के विचारों नें तो हद ही कर दी उसने एक ऐसी मशीन बनाई जो चौथे डाईमेशन यानी टाईम में जाकर सफर करती है।…. जो वर्तमान से भूतकाल जा सके और भविष्य में भी।

यह सिलसिला तब जाकर रुका जब आईनस्टाईन के थ्योरीज नें पृथ्वी को हिलाकर रख दिया।

जो कि रीमान के बनाए समीकरण आईनस्टाईन के जनरल रिलेटीविटी के प्रबंध के लिए बहुत काम आए थे। मतलब उनके जो मल्टीडाईमेंशन के गणित थे उसका उपयोग कर ही आईनस्टाईन वक्र स्पेस की कल्पना पूरी कर सके। आईनस्टाईन के विचारों नें और थेअरी ने यह प्रूव किया की विश्व में तीन से ज्यादा डाईमेशन हो सकते है और इन्सान टाईम ट्रैवल भी कर सकता है। तब जब वह प्रकाश गति हांसिल करेगा, या उससे अधिक गति प्राप्त करेगा। आईनस्टाईन के अनुसार टाईम ट्रैवल करना संभव है। जब हम प्रकाश गति प्राप्त करेंगे.

जैसे आज हम लोगों ने ज्यादा से ज्यादा गति कितनी प्राप्त की है। तो वो गति है 10 से 11 किलोमीटर प्रति सेकंड वह भी हमारे यान की गति है। यह गति तो प्रकाश गति के मायने शून्य की तरह है। ऐसे गति से अगले सौ सालों मे थोडी थोडी गति प्राप्त करें मतलब अगले बीस साल में अगर 30 किमी प्रति सेकंड की दर से, तो  हमारी गति हो  जायेगी 150 किमी प्रति सेकण्ड फिर भी यह प्रकाश गति के लिए कुछ मायने नहीं रखती। अगर हमें इस स्पीड से गति, प्रकाश के बराबर प्राप्त करनीं है तो

20 साल — 30 kmps
100 साल — 150 kmps

तो सोचे कितनी शताब्दियाँ बीत जाऐगी। प्रकाश गति प्राप्त करनें में। उसके बाद हम अगर उस प्रकाश गति वाले यान में बैठे तो सुदूर अन्तरिक्ष में उस गति में जाने के लिए हमे एक्सलरेशन (त्वरण) से पांच दस साल तो वह गति यान की गति में लाने के लिए ही लग जाएँगे क्यों की हम उस गति से अचानक ही नहीं ट्रैवल कर सकते अगर किया तो उस यान का वस्तुमान और दबाव के कारण हम मर जायेंगे।

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